Shayari
आहिस्ता आहिस्ता ना चल जिंदगी
ज़रा ऊपर तो पकड़,
मंजिल की चाहत में निकल गए ये कदम,
कहीं दूर ना हो
तमन्नाओं की चाहत कभी रुक न सके, निरंतर प्रयासरत हो कर मंजिल की जुस्तज़ू में तलाश करते रहे,
नव विचार, अनुभूति, संमिश्रण, संग्रह रचना
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सत्यमेव जयते
सत्य की जीत होती है
देखत ही जो मन हरै, सुख अखियन को दै, रूप बिखेरै ताहि जो, जग वशीभूत अंत लै। (पेंटिंग)
सट्टे की जेईटी होटी है सेट की जेईटी होटी है समया मिल बैठो मैं जाट हूं समेटे जयते
लोक कला लोक
कलाचेरे आज चर्चा फॉस्ट आर्ट यानी महम कला के बारे में करें।
आहिस्ता आहिस्ता ना चल रही जिंदगी
ज़रा फूल तो पकड़, मंजिल की चाहत में निकल गए ये कदम, कहीं दूर ना पड़ जाए
तमन्नाओं की चाहत कभी रुक न सकेे
अच्छे और बुरे कर्म
व्यक्ति,जब अपनी चाहत और तमन्नाओं की पूर्ति कर लेता है तो सुकून और चैन की जिंदगी जीता है। चाहें, उसकी चाहत या रुचि किसी भी क्षेत्र में क्यों ना हो। लेकिन मनुष्य की चाहत या रुचि से दूसरे व्यक्ति को कितना सुकून और चैन/खुशी मिलता है इससे काम की अच्छाई और बुराई का पता चलता है। तो आइए अब इनका विश्लेषण करते हैं
* एक आदमी जो हिंसक हो,तो उसे मार-पीट,गाली- गलौज,लूट-पाट, करने से उसे खुशी और संतुष्टि तो मिलती है, लेकिन दूसरों को उसके काम से डर,भय,चिंता,असुरक्षा महसूस होती है और उसके काम से परेशान होकर हिंसक को हटाने के लिए कई तरह के उपाय किए जाते हैं जैसे आंतकवादी,डाकू,चोर,लूटेरे । तो उस काम को अच्छा नहीं कह सकते।
यदि कोई व्यक्ति क्रियात्मक काम करता है जैसे - नृत्य,गाना,वाद्य, शिल्प कला, चित्रकला,विज्ञान, आविष्कार आदि । तो उस काम से कार्यकर्ता तो खुश और संतुष्ट होता हीं है। लेकिन उसके कृत्य से अन्य व्यक्ति भी आनंदित और खुश होते हैं।यानी कर्ता और भोक्ता दोनों ही संतुष्ट होते हैं तो इस काम को अच्छा कहा जाएगा।
पर दो पल के क्षण में,ना जानें कितने लोग मिलते हैं यहां पर कुछ के विचार आपस में मिल जातें हैं वो
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